मिथिला वासियों की अलग राज्य “मिथिला” की मांग कोई नयी बात नहीं हैं, ये आज़ादी के समय से पहले की मांग है लेकिन कोई जोरदार संगठन और आवाज़ न होने के कारण केंद्र सरकार के तरफ से इस मांग की हमेशा उपेक्षा ही हुई हैं! हाल के दिनों में दरभंगा के सांसद कीर्ति झा आज़ाद और अन्य लोगो ने भी मिथिला अलग राज्य की मांग तेजी से उठाइ है!
लेकिन अब मुख्य बात ये हैं की क्यों मिथिला अलग राज्य की मांग हो रही हैं, क्या ये सही और जायज है! निचे लिखे कुछ बिंदु आपको नहीं इस मांग को जायज समझने पे मजबूर कर देगी! मिथिला क्षेत्र का विकास के नाम पे हमेशा ही उपेक्षा और नजरअंदाज़ी हुयी है ! अभी भी बिहार में मिथिला के सारे जिले सबसे पिछले जिलों में से आते हैं और किसी भी सरकार ने अभी तक इसके विकास पे ध्यान नहीं दिया!
मिथिला के अधिकतम युवा और कमाऊ वर्ग रोजगार की तलाश में मिथिला से पलायन कर चुकें हैं, यही वो मिथिला हैं जो खुद में कभी देश हुआ करता था और सिर्फ 3-4 चीनी मीलों से लाखों लोगो को रोजगार मिलता था, लेकिन अब वही मिथिला बदहाली के हाशिये पे खड़ा हैं और एक तरह से विकास की भीख मांगने पर मजबूर हैं!
विकास के नाम पे मिथिला में अभी तक नेताओ के फ़र्ज़ी भाषण और वादे के अलावा कुछ और सुनने को नहीं मिला हैं – सारे फैक्ट्री, लघु उद्योग और चीनी मिलें बंद पड़ी हैं और कोई इसपे ध्यान नहीं दे रहा, गरीब और गरीब हो गया और सपने रखने वाले लोग मिथिला से परिवार सहित पलायन कर गये!
One thought on “मिथिलावासी क्यूँ कर रहे हैं अलग राज्य की मांग – जरूर पढ़े”